मेंटल हेल्थ की आम दवाइयाँ: वे क्या इलाज करती हैं और कैसे काम करती हैं
प्रकाशित: 8 सितंबर 2026 · MentalHealthResidential.org
मेंटल हेल्थ की दवाइयाँ बीमारी को जड़ से खत्म नहीं करतीं। यह शुरू में ही साफ कह देना ज़रूरी है।
वे जो करती हैं, वह है लक्षणों की तीव्रता इतनी कम करना कि व्यक्ति थेरेपी में ठीक से शामिल हो सके, रोज़मर्रा की ज़िंदगी में लौट सके, और समय के साथ स्थिर हो सके। इनमें से ज़्यादातर दवाइयाँ धीरे-धीरे भी काम करती हैं — इस हफ्ते शुरू किए गए एंटीडिप्रेसेंट को आप अगले हफ्ते परख नहीं सकते — और यही सबसे आम वजह है कि लोग दवा को कुछ कर दिखाने का मौका मिलने से पहले ही उसे लेना बंद कर देते हैं।
आगे बताया गया है कि हर श्रेणी किस चीज़ पर काम करती है, असर का पता चलने में कितना समय लगता है, और प्रिस्क्राइबर से कौन-से खास सवाल पूछने लायक हैं।
साइकियाट्रिक दवाइयाँ असल में क्या करती हैं
ये दवाइयाँ दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को नियंत्रित करती हैं — न्यूरॉन्स के बीच का वह रासायनिक संकेत जो मूड, ध्यान, धारणा और व्यवहार को चलाता है। जब यह संकेत गड़बड़ा जाता है, तो लगातार डिप्रेशन, बार-बार घेरने वाली एंग्ज़ायटी, साइकोसिस या बहुत तेज़ मूड स्विंग जैसे लक्षण जड़ पकड़ सकते हैं।
ज़्यादातर साइकियाट्रिक स्थितियों में शामिल न्यूरोट्रांसमीटर हैं सेरोटोनिन (मूड और भावनाओं का नियंत्रण), डोपामिन (प्रेरणा, इनाम, ध्यान), नॉरएपिनेफ्रिन (सतर्कता, ऊर्जा, एंग्ज़ायटी की प्रतिक्रिया), और GABA (दिमाग का मुख्य रोकने वाला संकेत — वह रसायन जो नर्वस सिस्टम की अति-सक्रियता पर ब्रेक लगाता है)। दवाओं की अलग-अलग श्रेणियाँ इस सिस्टम के अलग-अलग हिस्सों पर काम करती हैं।
यह तरीका समझ लेने से तीन बातें साफ हो जाती हैं जो वरना मनमानी लगती हैं: इनमें से ज़्यादातर दवाइयाँ घंटों में नहीं, हफ्तों में असर क्यों दिखाती हैं, खुराक बार-बार क्यों बदली जाती है, और जो एक व्यक्ति पर अच्छा काम करता है वह दूसरे पर बिल्कुल असर क्यों नहीं करता।
एंटीडिप्रेसेंट
अमेरिका में एंटीडिप्रेसेंट सबसे ज़्यादा लिखी जाने वाली साइकियाट्रिक दवाइयाँ हैं। CDC के National Center for Health Statistics के अनुसार, 2015–2018 के दौरान अमेरिका के 13.2% वयस्कों ने पिछले 30 दिनों में कोई एंटीडिप्रेसेंट लिया। नाम के बावजूद, ये सिर्फ डिप्रेशन का इलाज नहीं करतीं। ये एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर, OCD, PTSD और कुछ पुराने दर्द की स्थितियों के लिए भी पहली पसंद का इलाज हैं।
ये कैसे काम करती हैं: एंटीडिप्रेसेंट मूड को नियंत्रित करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर — मुख्य रूप से सेरोटोनिन, नॉरएपिनेफ्रिन और डोपामिन — की उपलब्धता बढ़ाते हैं, क्योंकि वे उन्हें छोड़ने वाली नर्व सेल में दोबारा सोखे जाने से रोकते हैं। इससे इन रसायनों को अगले न्यूरॉन पर असर करने के लिए ज़्यादा समय मिल जाता है।
मुख्य श्रेणियाँ:
- SSRIs (Selective Serotonin Reuptake Inhibitors) — उदाहरण में fluoxetine (Prozac) और sertraline (Zoloft) शामिल हैं। डिप्रेशन और एंग्ज़ायटी के लिए आम तौर पर सबसे पहले SSRIs आज़माए जाते हैं, क्योंकि पुराने एंटीडिप्रेसेंट की तुलना में इनके साइड इफेक्ट अपेक्षाकृत कम परेशान करने वाले होते हैं। कुछ लक्षणों में 2 से 4 हफ्तों में राहत मिल सकती है; पूरा असर आने में आम तौर पर 4 से 8 हफ्ते लगते हैं।
- SNRIs (Serotonin-Norepinephrine Reuptake Inhibitors) — उदाहरण में venlafaxine (Effexor XR) और duloxetine (Cymbalta) शामिल हैं। SNRIs सेरोटोनिन और नॉरएपिनेफ्रिन, दोनों पर काम करते हैं, जिससे ये जनरलाइज़्ड एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर, डिप्रेशन और पुराने दर्द से जुड़ी स्थितियों में असरदार होते हैं।
- ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट (TCAs) — amitriptyline (Elavil) जैसी पुरानी दवाइयाँ, जो तब इस्तेमाल होती हैं जब SSRIs या SNRIs काम न करें। इनके साइड इफेक्ट का दायरा ज़्यादा चौड़ा है और इन्हें ज़्यादा सावधानी से संभालना पड़ता है।
4 से 8 हफ्तों की यही अवधि वह हिस्सा है जिसे ध्यान में रखकर योजना बनानी चाहिए। साइड इफेक्ट अक्सर शुरुआती दिनों में ही आ जाते हैं; फायदा हफ्तों बाद आता है। जो लोग दूसरे हफ्ते में दवा छोड़ देते हैं, उन्होंने आम तौर पर दवा की पूरी कीमत चुका दी होती है और बदले में कुछ भी नहीं पाया होता।
अचानक बंद करना अपने आप में एक अलग समस्या है। कई एंटीडिप्रेसेंट धीरे-धीरे घटाए जाने के बजाय अचानक बंद किए जाने पर discontinuation symptoms (दवा बंद होने से जुड़े लक्षण) पैदा करते हैं — यह लत (addiction) से अलग चीज़ है, और इसी वजह से दवा बंद करने की कोई भी योजना प्रिस्क्राइबर के साथ मिलकर बनानी चाहिए, न कि बस रिफिल लेना छोड़ देना चाहिए। बंद करने पर क्या होता है, यह हर दवा में अलग होता है; Wellbutrin (bupropion) बंद करने पर क्या होता है, इस पर हमारी टाइमलाइन उनमें से एक को विस्तार से समझाती है।
एक और बात समझ लेना ज़रूरी है: अगर पहला एंटीडिप्रेसेंट काम न करे या ऐसे साइड इफेक्ट दे जो बर्दाश्त न हों, तो यह इलाज की नाकामी नहीं है — यह जानकारी है। सही दवा तक पहुँचने से पहले साइकियाट्रिस्ट आम तौर पर दूसरा या तीसरा विकल्प आज़माते हैं। यह सामान्य है और इसकी उम्मीद रहती है।
दवा के फॉलो-अप के लिए हर बार क्लीनिक जाना ज़रूरी नहीं होता: अब कई प्रिस्क्राइबर रूटीन चेक-इन वीडियो पर ही कर लेते हैं। वर्चुअल मेडिकेशन मैनेजमेंट कैसे काम करता है — और इसकी सीमाएँ क्या हैं — यह TeleMed Today की टेलीसाइकियाट्री गाइड में बताया गया है।
एंग्ज़ायटी की दवाइयाँ
एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर — जनरलाइज़्ड एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर, पैनिक डिसऑर्डर, सोशल एंग्ज़ायटी, खास फोबिया — New Jersey और पूरे देश में सबसे आम मेंटल हेल्थ स्थितियों में से हैं। एंग्ज़ायटी की दवाइयाँ मुख्य रूप से दो तरह से इस्तेमाल होती हैं: तीव्र लक्षणों को थोड़े समय के लिए संभालने में, और लंबे समय से चली आ रही एंग्ज़ायटी को कम करने में।
ये कैसे काम करती हैं: ये दवाइयाँ सेंट्रल नर्वस सिस्टम की अति-सक्रियता को शांत करती हैं और एंग्ज़ायटी के शारीरिक लक्षण कम करती हैं: दिल का तेज़ धड़कना, मांसपेशियों का तनाव, हर वक्त चौकन्ना रहना, और साँस लेने में दिक्कत।
मुख्य श्रेणियाँ:
- बेंज़ोडायज़ेपीन — उदाहरण में alprazolam (Xanax) और diazepam (Valium) शामिल हैं। ये जल्दी काम करती हैं और तीव्र एंग्ज़ायटी और पैनिक में असरदार हैं, लेकिन इनके साथ असली खतरे भी हैं। बेंज़ोडायज़ेपीन की लत लग सकती है, और लंबे समय तक इस्तेमाल से शारीरिक निर्भरता हो सकती है। New Jersey में, बाकी देश की तरह, डॉक्टर अब इन्हें एक दशक पहले की तुलना में ज़्यादा सावधानी से लिखते हैं। ये आम तौर पर थोड़े समय के इस्तेमाल या किसी खास स्थिति की एंग्ज़ायटी के लिए ठीक हैं, लंबे समय के अकेले इलाज के रूप में नहीं।
- Buspirone — एक नॉन-बेंज़ोडायज़ेपीन एंग्ज़ायटी दवा, जो एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर को संभालने में इस्तेमाल होती है — बिना उस नींद लाने वाले असर या निर्भरता की चिंता के जो बेंज़ोडायज़ेपीन के साथ जुड़ी है। पूरा असर आने में इसे कई हफ्ते लगते हैं, इसलिए यह तीव्र पैनिक में काम की नहीं है, पर लंबे समय की एंग्ज़ायटी संभालने के लिए यह ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है।
रफ्तार का यही फर्क असल जाल है। बेंज़ोडायज़ेपीन एक घंटे से भी कम में असर करती है, इसलिए वह ज़्यादा असरदार दवा लगती है; buspirone और SSRIs को हफ्ते लगते हैं, इसलिए लगता है कि वे काम नहीं कर रहे। लंबे समय की एंग्ज़ायटी के लिए दवा लिखने का चलन इसी वजह से धीमे विकल्पों की ओर गया है, इसके बावजूद नहीं।
SSRIs और SNRIs भी एंग्ज़ायटी डिसऑर्डर में अक्सर इस्तेमाल होते हैं और लंबे समय के इलाज के लिए अक्सर इन्हें ही प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि इनमें बेंज़ोडायज़ेपीन जैसा निर्भरता का खतरा नहीं है।
मूड स्टेबलाइज़र
मूड स्टेबलाइज़र बाइपोलर डिसऑर्डर के इलाज की बुनियाद हैं — एक ऐसी स्थिति जिसमें मेनिया (बढ़ी हुई, आवेगी, अक्सर विनाशकारी ऊर्जा) और डिप्रेशन के दौर बारी-बारी से आते हैं। बिना इलाज के ये चक्र रिश्तों, नौकरी और शारीरिक सेहत को तबाह कर सकते हैं।
ये कैसे काम करती हैं: मूड स्टेबलाइज़र न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि और दिमाग में बिजली के संकेतों को नियंत्रित करके मूड एपिसोड की तीव्रता कम करते हैं। इनका इस्तेमाल चल रहे एपिसोड के इलाज और आगे के एपिसोड रोकने, दोनों के लिए होता है।
मुख्य विकल्प:
- Lithium — सबसे पुरानी और सबसे ज़्यादा अध्ययन की गई साइकियाट्रिक दवाओं में से एक। Lithium आज भी बाइपोलर डिसऑर्डर का अग्रिम पंक्ति का इलाज है और आत्महत्या का जोखिम कम करने में इसका असर दर्ज है। इसके लिए नियमित ब्लड मॉनिटरिंग ज़रूरी है, क्योंकि इसका असरदार स्तर और ज़हरीला स्तर एक-दूसरे के काफी करीब हैं, लेकिन सही तरीके से संभाला जाए तो यह बहुत असरदार है।
- एंटीकनवल्सेंट — मिर्गी के लिए बनी दवाइयाँ मूड स्टेबलाइज़र के रूप में भी असरदार साबित हुई हैं। Valproate (Depakote) और lamotrigine (Lamictal) आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं। खासकर lamotrigine का इस्तेमाल अक्सर बाइपोलर डिसऑर्डर के डिप्रेशन वाले दौर को रोकने के लिए किया जाता है।
इस पेज पर Lithium ही वह एक श्रेणी है जिसके साथ मॉनिटरिंग की असली शर्त जुड़ी हुई है। ब्लड टेस्ट कोई वैकल्पिक एहतियात नहीं हैं — इन्हीं के ज़रिए खुराक उस दायरे में रहती है जहाँ दवा नुकसान के बजाय फायदा करती है।
Middlesex County के जिन लोगों के परिवार में कोई मेनिक एपिसोड में है या तेज़ी से मूड बदल रहा है, उनके लिए सही शुरुआत साइकियाट्रिक मूल्यांकन है — सिर्फ प्राइमरी केयर अपॉइंटमेंट नहीं।
एंटीसाइकोटिक
एंटीसाइकोटिक दवाइयाँ उन स्थितियों का इलाज करती हैं जिनमें हकीकत को समझने की क्षमता गड़बड़ा जाती है: स्किज़ोफ्रेनिया, स्किज़ोअफेक्टिव डिसऑर्डर, और गंभीर बाइपोलर डिसऑर्डर या मेजर डिप्रेशन में दिखने वाले साइकोटिक लक्षण। कुछ एंटीसाइकोटिक डिप्रेशन में सहायक (add-on) इलाज के रूप में FDA से मंज़ूर हैं; एंग्ज़ायटी के लिए इनका इस्तेमाल off-label है।
ये कैसे काम करती हैं: एंटीसाइकोटिक मुख्य रूप से डोपामिन की गतिविधि को नियंत्रित करते हैं — वे उन अति-सक्रिय डोपामिन रिसेप्टर को रोकते हैं जो मतिभ्रम, भ्रम और अव्यवस्थित सोच में भूमिका निभाते हैं।
दो पीढ़ियाँ:
- टिपिकल (पहली पीढ़ी के) एंटीसाइकोटिक — haloperidol (Haldol) जैसी दवाइयाँ 1950 के दशक में बनी थीं और आज भी इस्तेमाल होती हैं। ये साइकोसिस के पॉज़िटिव लक्षण (मतिभ्रम, भ्रम) असरदार तरीके से कम करती हैं, लेकिन इनसे शरीर की हरकतों से जुड़े साइड इफेक्ट का जोखिम ज़्यादा रहता है।
- एटिपिकल (दूसरी पीढ़ी के) एंटीसाइकोटिक — aripiprazole (Abilify) और quetiapine (Seroquel) जैसी दवाइयाँ लक्षणों के ज़्यादा बड़े दायरे पर काम करती हैं और आम तौर पर इनके साइड इफेक्ट संभालना आसान होता है, हालाँकि इनके अपने जोखिम हैं, जिनमें वज़न बढ़ना और मेटाबॉलिक असर शामिल हैं। अब पहली पीढ़ी के विकल्पों की तुलना में एटिपिकल कहीं ज़्यादा लिखे जाते हैं।
साइकोसिस में तुरंत क्लिनिकल मूल्यांकन ज़रूरी है। अगर Middlesex County में कोई ऐसे लक्षण दिखा रहा है — ऐसी चीज़ें सुनना या देखना जो दूसरों को नहीं दिखतीं, ऐसी बातें कहना जो साफ तौर पर हकीकत से कटी हुई हैं, या अचानक बहुत अव्यवस्थित हो जाना — तो यह साइकियाट्रिक इमरजेंसी है और इसमें फौरन पेशेवर मदद लेनी चाहिए। 988 पर कॉल या टेक्स्ट करें, या अगर कोई तुरंत खतरे में है तो 911 पर कॉल करें।
स्टिमुलेंट
स्टिमुलेंट दवाइयाँ मुख्य रूप से अटेंशन-डेफिसिट/हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर (ADHD) के लिए दी जाती हैं, जिसे अब एंग्ज़ायटी और डिप्रेशन के साथ काफी हद तक जुड़ी हुई स्थिति के रूप में समझा जाने लगा है। बिना डायग्नोसिस वाले ADHD के कई वयस्क सबसे पहले मूड के लक्षणों के साथ सामने आते हैं, और ADHD के साथ एंग्ज़ायटी या डिप्रेशन का होना आम है।
ये कैसे काम करती हैं: स्टिमुलेंट प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स में डोपामिन और नॉरएपिनेफ्रिन की उपलब्धता बढ़ाते हैं — दिमाग का वही हिस्सा जो ध्यान, आवेग पर काबू और वर्किंग मेमोरी संभालता है।
मुख्य विकल्प:
- एम्फेटामिन — Adderall (amphetamine salts) और Vyvanse (lisdexamfetamine) आम तौर पर लिखे जाते हैं। Vyvanse का असर ज़्यादा लंबा और ज़्यादा एकसार रहता है। इसे शरीर में बदलना पड़ता है, इसलिए इसका असर immediate-release amphetamine से धीमा आता है, लेकिन इसका भी दुरुपयोग हो सकता है; FDA लेबल चेतावनी देता है कि इसे सूंघने या इंजेक्ट करने से ओवरडोज़ का खतरा बढ़ता है।
- मिथाइलफेनिडेट — Ritalin और Concerta दूसरे विकल्प हैं, जो अक्सर उन बच्चों और वयस्कों में इस्तेमाल होते हैं जिन पर एम्फेटामिन का असर अलग तरह से होता है।
इस पेज की बाकी दवाओं के उलट, स्टिमुलेंट उसी दिन असर करते हैं जिस दिन आप उन्हें लेते हैं, इसलिए यही वह एक श्रेणी है जहाँ "क्या यह काम कर रही है" का जवाब दो महीने के बजाय एक हफ्ते में मिल सकता है। इनमें से किसे चुना जाए, यह असर की अवधि और इस बात पर निर्भर करता है कि किसी व्यक्ति पर दवा कैसा असर करती है; ADHD की तीन सबसे आम स्टिमुलेंट दवाओं की तुलना हमने अलग से की है।
नॉन-स्टिमुलेंट दवाइयाँ — जिनमें atomoxetine (Strattera) और कुछ एंटीडिप्रेसेंट शामिल हैं — भी ADHD में इस्तेमाल होती हैं, खासकर तब जब एंग्ज़ायटी, दिल से जुड़ी चिंताओं या नशे के इतिहास की वजह से स्टिमुलेंट ठीक न हों।
सुरक्षा चेतावनियाँ जिनके बारे में पूछें
- एंटीडिप्रेसेंट — आत्महत्या के नए या बढ़ते विचारों पर नज़र रखें, खासकर 25 साल से कम उम्र के लोगों में।
- बेंज़ोडायज़ेपीन — इन्हें कभी भी opioids या शराब के साथ न लें, और कभी भी अचानक बंद न करें।
- Valproate (Depakote) — इससे लिवर को गंभीर नुकसान और pancreatitis (पैंक्रियास की सूजन) हो सकती है, और गर्भावस्था में इसके संपर्क में आए बच्चे में गंभीर जन्मजात विकृतियाँ और कम IQ हो सकता है। FDA लेबल के अनुसार, जो भी गर्भवती हो सकती है, उसे यह दवा तभी दी जानी चाहिए जब दूसरी दवाओं ने काम न किया हो, और तब भी सिर्फ असरदार गर्भनिरोधक के साथ। अगर आप गर्भवती हैं या गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो तुरंत दवा लिखने वाले को बताएँ।
- Lamotrigine (Lamictal) — कोई भी रैश (चकत्ते) दिखे तो तुरंत दवा लिखने वाले को बताएँ।
- Lithium — पूछें कि lithium toxicity के किन लक्षणों पर नज़र रखनी है, और ब्लड टेस्ट समय पर करवाते रहें।
- एंटीसाइकोटिक (जैसे quetiapine या aripiprazole) — डिमेंशिया से जुड़े साइकोसिस वाले बुज़ुर्गों में ये मौत का खतरा बढ़ाती हैं, और युवाओं में आत्महत्या के विचारों को लेकर इन पर चेतावनी है।
इनमें से कोई भी दवा खुद से बंद न करें।
अकेली दवा शायद ही कभी पूरा जवाब होती है
दवाओं की इन सारी श्रेणियों में, दवा आम तौर पर तब सबसे अच्छा काम करती है जब वह एक बड़े इलाज प्लान का हिस्सा हो। डिप्रेशन, पैनिक डिसऑर्डर और OCD में, दवा के साथ थेरेपी जोड़ना अकेली दवा से बेहतर काम करता है। बाइपोलर डिसऑर्डर और स्किज़ोफ्रेनिया में, दवा के साथ-साथ साइकोएजुकेशन, परिवार का सहारा और केस मैनेजमेंट ज़रूरी हैं। ADHD में स्टिमुलेंट के अलावा व्यवहार से जुड़ी रणनीतियाँ और सहूलियतें भी अच्छा असर करती हैं।
प्रिस्क्राइबर के साथ अपॉइंटमेंट के लिए चार सवाल
Middlesex County में रहने वाले New Jersey के जो लोग दवा के विकल्प तौल रहे हैं, उन्हें दवा लिखने वाले डॉक्टर से ये सवाल ज़रूर पूछने चाहिए: यह दवा किस चीज़ को निशाना बना रही है? इसका असर क्या होगा और कब तक दिखेगा? मुझे किन साइड इफेक्ट पर नज़र रखनी चाहिए? हमें कैसे पता चलेगा कि यह काम कर रही है — और अगर नहीं कर रही, तो आगे की योजना क्या है?
दूसरा और चौथा सवाल वे हैं जिन्हें लोग पूछना भूल जाते हैं और बाद में सोचते हैं कि काश पूछ लिया होता। "मुझे कब तक कुछ फर्क महसूस होना चाहिए" का साफ जवाब धीमे हफ्तों को दवा छोड़ने की वजह के बजाय एक योजना में बदल देता है।
अगर आपके पास अभी कोई प्रिस्क्राइबर नहीं है, तो ये लाइनें उसे ढूँढने में आपकी मदद कर सकती हैं:
Middlesex County Behavioral Health Navigators मेंटल हेल्थ और सब्सटेंस यूज़ सेवाएँ ढूँढने में मुफ्त और गोपनीय मदद देते हैं: 732-745-3810।
NJMentalHealthCares New Jersey की बिहेवियरल हेल्थ जानकारी लाइन है, जिसे प्रशिक्षित विशेषज्ञ चलाते हैं और जो पूरे राज्य में सही इलाज के विकल्प पहचानने में मदद कर सकते हैं: 866-202-4357।
988 Suicide & Crisis Lifeline — अगर आप या आपका कोई जानने वाला मेंटल हेल्थ क्राइसिस में है, तो 988 पर कॉल या टेक्स्ट करें। यह 24/7 उपलब्ध है। कॉल करने के लिए आत्महत्या के विचार आना ज़रूरी नहीं; 988 हर उस व्यक्ति का साथ देता है जो गहरी भावनात्मक तकलीफ में है।
Kendall Park, NJ के पास हैं? Emerald Wellness, Kendall Park में एक आउटपेशेंट मेंटल हेल्थ सेंटर है, जो partial care, intensive outpatient program (IOP) और perinatal IOP देता है। यहाँ रेज़िडेंशियल ट्रीटमेंट या detox नहीं होता। इसे Periscope Behavioral Health संचालित करता है, जो इस वेबसाइट को प्रकाशित करने वाली संस्था से संबद्ध (affiliated) है। Kendall Park, NJ पेज (अंग्रेज़ी में) देखें या सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9 से शाम 5 बजे तक (732) 987-0183 पर कॉल करें।
अमेरिका में कहीं भी लाइसेंस प्राप्त इलाज कार्यक्रम खोजने के लिए FindTreatment.gov देखें या SAMHSA नेशनल हेल्पलाइन 1-800-662-4357 पर कॉल करें। संकट में 988 पर कॉल या टेक्स्ट करें।
SAMHSA राष्ट्रीय हेल्पलाइन (अमेरिका)
निःशुल्क और गोपनीय जानकारी तथा उपचार विकल्पों के लिए रेफरल। यह अमेरिका आधारित सेवा है।
1-800-662-HELP (4357) पर कॉल करेंमानसिक स्वास्थ्य संकट में 988 पर कॉल या मैसेज करें (अमेरिका)।
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